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Tuesday, 25 April 2017

इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की विधि मान्यता



इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की विधि मान्यता  हेतू दो शर्तें दी गयीं हैं |
(क)  किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में निर्मित किया गया है या उपलब्ध कराया जाता है;
(ख)  इस प्रकार पहुंच योग्य है कि पश्चातवर्ती संदर्भ के लिए उपयोग में लाए जाने हेतु सुगम है |

(क)  किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में निर्मित किया गया है या उपलब्ध कराया जाता है; से आशय है कि इस धारा में इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की विधिक मान्यता के बारे में प्रावधान किए गए हैं | इसके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख भी उतने ही मान्य है जितने की पहले से चले आ रहे लिखे हुए टंकण लिपि में और मुद्रित किए हुए दस्तावेजों की मान्यता है | इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म  से मतलब धारा 2(1) (द)  में दी गई परिभाषा अनुसार, कोई भी सूचना जो ऑडियो वीडियो, डाटा, टेक्स्ट या मल्टी मीडिया फाइल, जो मीडिया चुंबकीयप्रकाशीय कंप्यूटर स्मृति माइक्रोफिल्म, कंप्यूटर द्वारा उत्पादित माईक्रोफिस्च, समरूप युक्ति में उत्पादित प्रेषित प्राप्त भंडारित की जाती है, आदि सभी इसमें शामिल हैं |
इस प्रकार धारा 4 का प्रभाव भारतीय दंड संहिता की धारा 29 - , 167,172, 173,175, 192, 204,463, 464,466,468,469,470,471,474,476,477-क पर तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 3, 17, 22,-,  35,39, 59, 65 -, 65-, 81-, 85 , 90-क,131 आदि पर प्रभावी है |
उपरोक्त धारा के अनुसार यदि कोई दस्तावेज यदि पूर्ववत कागज़ में ना रखा जाकर इलेक्ट्रॉनिक रूप में निर्मित किया जाता है जैसे कोई भुगतान की रसीद, बस/रेल टिकट, रजिस्ट्री, स्टाम्प आदि तो वह भी विधि मान्य होगा बशर्ते वह पश्चातवर्ती संदर्भ के लिए उपयोग में लाए जाने हेतु सुगम हो / पश्चातवर्ती संदर्भ हेतू प्राप्त किया जाना संभव हो अर्थात यह तैयार होने के बाद भी उपलब्ध रहे |



()  इस प्रकार पहुंच योग्य है कि पश्चातवर्ती संदर्भ के लिए उपयोग में लाए जाने हेतु सुगम है से आशय है कि इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख अमूर्त रूप में होते हैं व शीघ्र नष्ट हो सकते है अतः इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को संधारित (स्टोर) किया जाना चाहिये जिससे कि वह किसी पश्चातवर्ती समय में चाहे जाने पर सन्दर्भ हेतू उपलब्ध रहे |
उदाहरण कि लिये दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के अनुसार “ संज्ञेय अपराध किये जाने से सम्बंधित प्रत्येक इत्तिला,यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को मौखिक रूप से दी गयी हो तो उसके द्वारा या उसके निदेशाधीन लेखबद्ध कर ली जाएगी और इत्तिला देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी और प्रत्येक ऐसी इत्तिला पर,चाहे वह लिखित रूप में दी गयी हो या पूर्वोक्त रूप में लेखबद्ध की गयी हो, “ निर्देशित किया गया है |
वर्तमान में संज्ञेय अपराध किये जाने से सम्बंधित प्रत्येक इत्तिला,प्रथम सूचना प्रतिवेदन (ऍफ़ आई आर), क्राईम क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सी सी टी एन एस)  सिस्टम में इन्द्राज की जा रही है | समस्त  प्रथम सूचना प्रतिवेदन (ऍफ़ आई आर), क्राईम क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सी सी टी एन एस)  सिस्टम में संधारित (स्टोर) रहती है|
अतः यह इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के रूप में माना जाएगा क्योंकि एस प्रकार की इत्तिला को 1)  किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में निर्मित किया गया है या उपलब्ध कराया गया है; तथा 2) यह इस प्रकार पहुंच योग्य है कि पश्चातवर्ती संदर्भ के लिए उपयोग में लाए जाने हेतु सुगम है |
इसी प्रकार अपराध की जांच एवं विवेचना में मोबाइल सेवा प्रदाताओं से मोबाईल की कोल डिटेल रिकोर्ड (सी डी आर) प्राप्त की जाती है | मोबाइल सेवा प्रदाताओं द्वारा मोबाईल की कोल डिटेल रिकोर्ड (सी डी आर) संधारित (स्टोर) की जाती है जो बाद में उपलब्ध कराई जा सकती है | अतः कोल डिटेल रिकोर्ड (सी डी आर) यह इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के रूप में माना जाएगा क्योंकि इसे 1)  किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में निर्मित किया गया है या उपलब्ध कराया गया है; तथा 2) यह इस प्रकार पहुंच योग्य है कि पश्चातवर्ती संदर्भ के लिए उपयोग में लाए जाने हेतु सुगम है |    

न्यायिक निर्णय उदाहरण :- न्यायालय के द्वारा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को मान्यता
1.      मोनिंदर सिंह पंढेर एवं अन्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी एवं अन्य के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि जहां कानूनन किसी मामले में कोई सूचना या अन्य तथा लिखित में या टाइप किया हुआ या प्रिंट किया हुआ हो वहां अगर वह सूचना या तथ्य इलेक्ट्रॉनिक तरीके में दिया गया हो तो भी उतना ही मान्य किया जाएगा  |
2.      डाईबोल्ड सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड बनाम द कमिश्नर ऑफ कमर्शियल टैक्स के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अभि निर्धारित किया की सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को मान्यता प्रदान कर दी है अब इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य कानूनी रुप से राज्य है इसकारण हर दस्तावेज के रुप में रखने का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि उसको  इलेक्ट्रॉनिक रूप में भी रखना उतना ही मान्य होगा |
3.      कल्याण शील कंपनी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के मामले में भी पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक गजट में या वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाने वाली सूचनाओं को राजकीय गजट में ही प्रकाशित किया हुआ माना है क्योंकि आप किसी दस्तावेज का इलेक्ट्रॉनिक रूप में दिया जाना भी पूरी तरह से मान्य है |
4.      रेड्डी एवं अन्य बनाम हिमालिया हाइड्रो प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य के मामले में कंपनी का मानना था कि यदि ईमेल के माध्यम से भेज दिया गया है सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 4 के अनुसार माना जाएगा |

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